Akhtar Sheerani Shayari Gazal in Hindi

Akhtar Sheerani Shayari Gazal in Hindi  Akhtar Sheerani अख्तर शीरानी भारत के प्रसिद्ध शायर लेखक और ग़ज़ल रचियता थे उनका जनम  1905  रांची ( झारखण्ड ) में हुआ था. आज इस आर्टिकल में हम अख्तर शिरानी की उस्रदु शायरी को हिंदी और इंग्लिश भाषा में लिख रहें है ताकि उनके प्रशंषकों को पड़ने में आसानी हो. दोस्तों अगर आप शायरी के शौकीन है तो हमारी वेबसाइट को फॉलो करें इसमें हम अलग अलाहग शायरों की शायरी ग़ज़ल, पोएट्री और कोट्स शेयर करते हैं.


न वो खिजा रही बाक़ी न वो बहार रही 

रही तो बेरी कहानी यादगार रही 


काँटों से दिल लगाओ जो ता उम्र साथ दें

फूलों का क्या जो साँसों की गर्मी न सह सके  


Akhtar Sheerani  shayari in hindi


 Akhtar Sheerani Shayari in Hindi

chand tasviren butta, chand hasino ke khatut

bada marne ke mere ghar se ye saman  nikla


चंद  तस्वीरें  बुत्ता , चाँद  हसीनो  के  खतूत 

बाद मरने  के  मेरे  घर  से  ये  सामान  निकला 


Muddate ho gayi bichhde huye tumse lekin

aaj tak dil se mere yaad tumhari na gayi


मुद्दते  हो  गयी  बिछड़े  हुए  तुमसे  लेकिन 

आज  तक  दिल  से  मेरे  याद  तुम्हारी  न  गयी 


yaad aao mujhe lillaah n tum yaad karo

meri or apni jawani ko barwad n karo


याद आओ मुझे लिल्लाह न तुम याद करो 

मेरी और अपनी जवानी को बर्वाद न करो 


Khafa hai fir bhi akar chhed jate hai tasbbur

hmare haal par mehrwani ab bhi hoti hai


खफा  है  फिर  भी  आकर  छेड़  जाते  है  तसब्बुर 

हमारे  हाल  पर  मेहरवानी  अब  भी  होती  है 


kuchh to tanhayi ki raton ka sahara hota

tum n hote n sahi jiker tumhara hota


कुछ  तो  तन्हाई  की  रातों  का  सहारा  होता 

तुम  न  होते  न  सही  जीकर  तुम्हारा  होता 


un ras bhari ankho me hyaa khel rahi hai

do, jahar ke pyalo mein kzaa khel rahi hai


उन रास भरी आँखों में ह्या खेल रही है 

दो ,जहर के प्यालो में क़ज़ा खेल रही है 


kaam aa saki na apni wafayen to kya karen

us bewafa ko bhool n jaye to kya kare


काम  आ  सकीय  न  अपनी  वफ़ाएं  तो  क्या  करें 

उस  बेवफा  को  भूल  न  जाये  तो  क्या  करे 


use fulon ki nazar ne meri yaad me betab dekha hai

sitaron ki nazar ne raat bhar bekhawab dekha hai


उसे  फूलों  की  नज़र  ने  मेरी  याद  में  बेताब  देखा  है 

सितारों  की  नज़र  ने  रात  भर  बेखवाब  देखा  है 


Teri surat srasar paikre mahtaab hai salma

tera jisam ek hajumein reshmo kam kahwab hai salma


तेरी  सूरत  सरासर  पैकरे  महताब  है  सलमा 

तेरा  जिसम  एक  हजूमें  रेशमा  काम  खवाब  है  सलमा 


Arzoo wasal ki rakhtihai preshaan kya kya

kya btau ke mere dil mein hai arman kya kya


आरज़ू  वसल  की  रखती है  परेशान  क्या  क्या 

क्या  बताऊ  के  मेरे  दिल  में  है  अरमान  क्या  क्या 


inhi gam ki ghatao se khushi ka chand niklega

andheri raat ke parde mein din ki roshani bhi hai


इन्ही  गम  की  घटाओ  से  ख़ुशी  का  चांद  निकलेगा 

अँधेरी  रात  के  परदे  में  दिन  की  रोशनी  भी  है 


uthte nahi ab to dua ke liye bhi hath

kis darza na umeed hai parvardigar se


उठते  नहीं  अब  तो  दुआ  के  लिए  भी  हाथ 

किस  दर्ज़ा  न  उम्मीद  है  परवरदिगार  से 


thak gaye ham karte karte intzar

Ik kyamat unka ana ho gya


थक  गए  हम  करते  करते  इंतज़ार 

इक  कयामत  उनका  आना  हो  गया 


mit chale meri umeedon ki tarah harf magar

aaj tak tere khaton se teri khushbu na gay


मिट  चले  मेरी  उमीदों  की  तरह  हर्फ़  मगर 

आज  तक  तेरे  खतों  से  तेरी  खुशबु  न  गयी 


raat bhar unka tasavbur dil ko tadpata hai 

ek naksha samne ata raha jata raha


रात  भर  उनका  तसव्बुर  दिल  को  तड़पता  है  

एक  नक्शा  सामने  अत  रहा  जाता  रहा 


Mujhe hai aetwar ae wadalekin

tumhe khud aitwar aye n aye


मुझे  है  ऐतवार  ऐ  वादा लेकिन 

तुम्हे  खुद  ऐतवार  आए  न  आए 


Ab jee mein hai ki unko bhula kar hi dekh lein

Wo baar baar yaad aye to kya kare


अब  जी  में  है  की  उनको  भुला  कर  ही  देख  लें 

वो  बार  बार  याद  ए  तो  क्या  करे 


mana ke sabke samne milne se hai hijab

lekin wo khwab mein bhi n aye to kya karen


माना  के  सबके  सामने  मिलने  से  है  हिजाब 

लेकिन  वो  ख्वाब  में  भी  न  आए  तो  क्या  करें 


Mubarak mubarak nya saal aaya

khushi ka smaa sari duniya pe chhaya


मुबारक  मुबारक  नया  साल  आया 

ख़ुशी  का  समा  सारी  दुनिया  पे  छाया 


Din raat may kade mein gujarti thi zindagi

akhtar wo be khudi ke jmane kidher gaye


दिन  रात  मई   कड़े  में  गुजरती  थी  ज़िन्दगी 

अख्तर  वो  बे  खुदी  के  जमाने  किधर  गए 



Tu mwere dil ki sun agosh bankar kah rah hai kuchh

teri nichi nazar to jane kya kuchh or kahti hai


तू मेरे दिल की सुन आगोश बनकर  कह रहा है कुछ

तेरी नीची नज़र तो जाने क्या कुछ और कहती है  


Bahar aayi hai mastana ghata kuchh or kahti hai 

Magar un shokh nazron ki haya kuchh or kahti hai  


बहार आई है मस्ताना घटा कुछ और कहती है

मगर उन शोख नज़रों की हया कुछ और कहती है  

और नया पुराने