Top 60+ Ahmad Faraz Shayari In Hindi अहमद फ़राज़ की बेहतरीन शायरी

Ahmad Fraz Shayari in Hindi. आज इस आर्टिकल में आपके लिए अहमद फ़रज़ की सबसे BEST शायरी पोस्ट की गयी है। अहमद फ़रज़ उर्दू के प्रसिद्ध शायर कवी और स्क्रिप्ट-राइटर थे।


इन्होने आसान शब्दों के शायरी लिखी जो पड़ने वाले के दिल को छू जाती थी। पेश है अहमद फ़रज़ की कलम से निकले हुए कुछ चुंनिंदा मोती:- 


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 👉Top Ahmad Faraz Shayari In Hindi

उसकी जफ़ाओं ने मुझे तहजीब सीखा दी है 

मैं रोते हुए सो जाता हूँ पर शिकवा नहीं करता 


जो जहर पी चूका हूँ तुम्ही ने मुझे दिया 

अब तुम तो ज़िन्दगी की दुआएं मुझे न दो 


 रंजिश ही सही दिल ही दुखने के लिए आ 

आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ


दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है 

और तुझसे बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता 


दिल भी पागल है की उस शख्स से वाबस्ता है 

जो किसी और का न होने दे न अपना रखे


अब के हम बिछड़े तो कभी ख्वावों में मिलें

जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिले


एक नफरत ही नहीं दुनिया में दर्द का सबब फ़राज़

मुहब्बत भी सकूं वालों को बड़ी तकलीफ देती है 


किस किस को बताएंगे जुदाई का सबब हम

तुन मुझसे खफा है तो ज़माने के लिए आ

 

Ahmad Faraz Shayari 2 line 

उसकी जफ़ाओं ने मुझे तहजीब सीखा दी है 

मैं रोते हुए सो जाता हूँ पर शिकवा नहीं करता 


उसकी जफ़ाओं ने मुझे तहजीब सीखा दी है


किसी बेवफा की खातिर ये जूनून कब तक

जो तुम्हें भुला चूका है उसे तुम भी भूल जाओ 

 

कुछ इस तरह गुज़री है जिंदगी जैसे

टा उम्र किसी दूसरे के घर में रहा 


हुआ है तुझसे बिछड़ने के बाद ये मालूम

की तू नहीं था तेरे साथ एक दुनिया थी


अब तो दिल तम्मना है तो ऐ काश यही हो

आंसू की जगह आँख से हसरत निकल आये 


हम अगर मंज़िलें न बन पाएं 

मंज़िलों तक का रास्ता हो जाएं 


अपने हो होते हैं जो दिल पे वार करते हैं फ़राज़

वरना गैरों को क्या खबर दिल की जगह कौन सी है 

 

Ahmad Faraz Poetry

फ़रज़ तेरे जूनून का ख्याल है वर्ना

ये क्या ज़रा वो सूरत सभी को प्यारी है 


उस शख्स  से इतना सा तालुक है फराज़ शायरी


उस शख्स  से इतना सा तालुक है फ़राज़

वो परेशान हो तो हमें नींद नहीं आती 


तुम तकल्लुफ को भी इखलास समझते हो फ़राज़

दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला


अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएं हम 

ये भी बहुत है तुझको अगर भूल जायें हम 


अब तेरे ज़िकर पे हम बात बदल देतें हैं 

कितनी रग़बत थी तेरे नाम से पहले पहले 


एक और बरस बीत गया उसके बगैर 

जिसके होते हुए होते थे जमाने मेरे 


जो गैर थे वो इसी बात पर हमारे हुए 

की  हमसे दोस्त बहुत बे खबर  हमारे हुए 


Ahmad Faraz Love Shayari

जिससे ये तबियत बड़ी मुश्किल से लगती थी 

देखा तो  वो तस्वीर हर एक दिल से लगी थी 


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किसी को घर से निकलते ही मिल गयी मंज़िल

कोई हमारी तरह उम्र भर सफर में रहा 


जी में जो आती कर गुज़रो कहीं ऐसा न हो

कल पशेमान हो की क्यों दिल का कहा माना नहीं 


मुद्दतें हो गयी फ़रज़ मगर 

वो जो दीवानगी की थी है अभी 


दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है

और तुझ से बिछड़ जाने का दर भी नहीं जाता


ज़िन्दगी ये सही गिला है मुझे

तू बहुत देर से मिला है मुझे


देखो ये किसी और की आँखें है की मेरी

देखूं ये किसी और का चेहरा है की तुम हो 


हो दूर इस तरह की तेरा गम जुदा न हो

पास आ तो यूँ की जैसे कभी तू मिला न हो 


Ahmad Faraz Best shayari

अभी कुछ और करिश्में ग़ज़ल के देखते हैं

फ़रज़ अब ज़रा लहजा बदल के देखते हैं 


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आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा

वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जायेगा


अगर तुम्हारे  आने ही का है सवाल तो फिर 

चलो फिर मैं हाथ बढ़त हूँ दोस्ती के लिए


कठिन है राह-गुज़र थोड़ी दूर साथ चलो 

बहुत कड़ा है सफर थोड़ी दूर साथ चलो 


इससे पहले की बेवफा हो जाएं 

क्यों न दोस्त हम जुड़ा हो जाएं 


दो घडी उससे रहो दूर तो यूँ लगता है 

जिस तरह साया ऐ दिवार से दिवार जुदा


इस से पहले की बेवफा हो जाएँ

क्यों न ऐ दोस्त हम जुड़ा हो जाएँ


हमको अच्छा नहीं लगता कोई हम नाम तेरा

कोई तुझ सा हो तो फिर नाम भी तुझ सा रखे 

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Ahmad Faraz Best shayari

भरी बहार में एक शाख पर खिला है गुलाब 

की जैसे तूने हथेली पे गाल रखा है 


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एक पल जो तुझे भूलने का सोचता हूँ

मेरी सांसे मेरी तक़दीर से उलझ जाती हैं 


इस तरह गौर से मत देख मेरा हाथ ऐ फ़राज़

इन लकीरों में हसरतों के सिबा कुछ भी नहीं 


और फ़राज़ चाहियें क्तिनी मोहब्बतें तुझे 

माओं ने तेरे नाम पर बच्चों का नाम रखा है 


दिवार क्या गिरी मेरे कच्चे मकान की 

लोगों ने मेरे घर को रास्ता बना लिया 


दिल भी पागल है की उस सख्श से वाबस्ता है

जो किसी और का होने दे न अपना रक्खे 


चला था ज़िकर ज़माने की बेवफाई का

सो आ गया है तुम्हारा ख्याल वैसे ही 


किस किस से मुहब्बत के वादे किये हैं तूने 

हर रोज़ एक न्य शख्स तेरा नाम पूछता है 


बंदगी हमने छोड़ दी है फ़राज़

क्या करें लोग जब खुदा हो जाएँ 

Ahmad Faraz Sad shayari

वो रोज़ देखता है दुबे हुए सूरज को फ़राज़

काश मैं भी शाम का मंज़र होता 


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कांच की तरह होते हैं गरीबों के दिल फ़राज़ 

कभी टूट जाते हैं कभी तोड़ दिए जाते हैं 


तुम्हारी दुनिया में हम जैसे हजारों थे फ़राज़

हम ही पागल थे जो तुम्हे पा के इतराने लगे 


अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएं हम

ये भी बहुत है तुझ को अगर भूल जाएं हम


मुझको मालूम नहीं हुस्न की तारीफ फ़राज़

मेरी नज़रो में हसीं वो है जो तुझ जैसा हो 

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Ahmad Faraz Dosti shayari

मैं क्या करूँ मेरे क़ातिल न चाहने पर भी

तेरे लिए मेरे दिल से दुआ निकलती है


Dosti shayari by ahmad faraz


दोस्ती अपनी भी असर रखती है 

बहुत याद आएंगे ज़रा भूल कर देखो 


अब दिल की तम्मना है तो ऐ काश यही हो

आंसू की जगह आँख से हसरत निकल आये 


जो कभी हर रोज़ मिला करते थे फ़राज़

वो चेहरे तो अब खाब ओ ख्याल हो गए 


आशिकी में मेरे जैसे खवाब मत देखा करो

वाबले  हो जाओगे महताब मत देखा करो 


गम ऐ दुनिया भी गम ऐ यार में शामिल कर लो

नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिले


इस क़दर मुसलसल थीं शिदतें जुदाई की

आज पहली बार उस से बेवफाई की


ऐसा डूबा हूँ तेरी याद के समंदर में फ़राज़ दिल 

का धड़कना भी अब तेरे क़दमों की सदा लगता है 


बच न सका खुदा भी मुहब्बत के तकाजों से फ़राज़

एक महबूब की खातिर सारा जहां बना डाला


उम्र भर कौन तालुक इतना

ऐ मेरे जान के दुश्मन तुझे अल्ल्हा रखे 


ये कह कर मुझे मेरे दुश्मन हँसता छोड़ गए 

तेरे दोस्त काफी हैं तुझे रुलाने के लिए 


वहाँ से एक पानी की बूँद न निकल सकीय फ़राज़

तमाम उम्र जिन आँखों को हम झेल लिखते रहे 


माना के तुम गुफ्तगू के फन में माहिर हो फ़राज़ 

बफा के लफ्ज़ पे अटको तो हमें याद कर लेना  


मुहब्बत के अंदाज़ जुदा होते हैं फ़राज़

किसी ने टूट के चाहा कोई चाह के टूट गया  


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Final Words:-

दोस्तों उम्मीद करता हूँ, आपने अहमद फ़राज़ की शायरी को पसंद किया होगा। इस पोस्ट में कुछ और ऐड करना चाहते हैं यां  सुधार करना चाहते हैं तो हमें जरूर बताएं।

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