Allama Iqbal Shayari - मुहमद इकवाल पोएट्री - Muhamad Iqbal Poetry

Allama Iqbal Poetry - मुहमद इकवाल भारत के बहुत प्रसिद्ध शायर हैं. इन्होने कई कवितायेँ और पोएट्री लिखी जिनमे से कुछ चुनिंदे शेयर यहाँ लिखे गए हैं. मुहमद इकवाल को आलमा इकवाल भी कहते हैं. इनका जनम 9  november 1877  को हुआ था. आलमा इकवाल द्वारा लिखी हुयी शायरी निचे दी गयी है 


खुदी को कर बुलंद इतना

के हर तक़दीर से पहले

खुदा बन्दे से खुद पूछे 

बता तेरी रज़ा क्या है 

 

allma iqwal best shayari hindi

जिन का मिलना नसीब में नहीं होता.

उनकी मोहब्बत कमाल की होती है.

 

allma iqwal shayari

Jinka milna naseeb me nahi hota

unki muhabat kmal ki hoti hai


तुम से गिला किया ना ज़माने से कुछ कहा.

बर्बाद हो  गये बड़ी सादगी से हम.


tum se gila n jmane se kuchh kaha

barbad ho gaye badi sadgi se hum


ज़िन्दगी से वादा यूँ ही 

निभाना पड़ गया 

खुल के रोना चाहा मगर 

मुस्कुराना पड़ गया  


allama iqwal sad shayari

हम जब निभाते है तो इस तरह निभाते है

सांस लेना तो छोड़ सकते है पर दामन यार नहीं


hum jab nibhate hai to is trha nibhate hai

sans lena to chhod sakte hai lekin daman yaar nahi 

 

allama iqbal shayari in hindi


आह जो दिल से निकल जायेगी.

क्या समझते हो खाली जायेगी.


aah jo dil nikal jayegi

kya samjhte ho khali jayegi


आँख लग गई भले से तो डर है

कोई आवाज़ फिर मुझे जगा देगी


aankh lag gayi bhale se to dar hai

koe awaz fir mujhe jgaa degi

 

न मंदिर में मौजूद है

न मस्जिद में छुपा है

जिस दिल में वफ़ा है 

उस दिल में खुदा है  

 

iqwal shayari

आज फिर तेरी याद मुश्किल बना देगी

सोने से काबिल ही मुझे रुला देगी


aaj fir teri yaad mushkil bna degi

sone se kabil hi mujhe rula degi

 

best allama iqbal shayari


मिटा दे अपनी हस्ती को अगर कुछ मर्तबा चाहे

कि दाना खाक में मिलकर गुले गुलज़ार होता है


mita de apni hasti ko agar kuchh mrtwa chahe

ki dana khak me milkar gulegulzar hota hai


माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं 

तू मेरा शौक़ देख मेरा इंतिज़ार देख


mana ki teri deed ke kabil nahi hu mai

tu mera shokh dekh mera intzar dekh


हज़ारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है

बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा


hjaron saal nargis apni benuri pe roti hai

badi mushkil se hota hai chaman me didwar paida


मिट जाये गुनाहो का

तस्सवुर ही जहां से इक़बाल

अगर हो जाये यकीन के

खुदा देख रहा है  


ज़िन्दगी भर याद करोगे के 

ज़िन्दगी में आया था कोई


jindagi bhar yaad karoge ke 

jindagi me koe aya tha

 

allama iqbal shayari lyrics


फ़क़त निगाह से होता है "फ़ैसला" दिल का

न हो निगाह में शोख़ी तो दिलबरी क्या है


fakat nigah se hota hai faisla dil ka 

n ho nigah me shokhi to dilwari kya hai 


तेरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ

मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ


tere ishak ki inteha chahta hu

meri sadgi dekh kya chahta hu


न पूछो मुझ से लज़्ज़त ख़ानमाँ बर्बाद रहने की 

नशेमन सैकड़ों मैं ने बना कर फूँक डाले हैं


n puchho mujh se lajjam khama barbad rahne ki

nasheman sainkdo mai ne bnakar foonk dale hai


ज़रूरी तो नहीं मोहब्बत लफ्जों में बयाँ हो

क्या सच मेरी आँखें तुम्हे कुछ नही कहती


jaruri to nahi muhabbat lafzo me bya ho

kya sach meri ankhe tumhe kuchh nahi kahti


allama muhammad iqbal shayari


जफा जो इश्क़ में हो तो है वह जफा नहीं,

सितम न हो तो मोहब्बत में कुछ मजा  नहीं


jfaa jo ishak me ho to vah jfaa nahi

sitam n ho to muhabbat me kuchh mja nahi


मुझ सा कोई शख्स नादान भी न हो.

करे जो इश्क़ कहता है नुकसान भी न हो.


mujh sa koe shakhash nadan bhi n ho

kare jo ishak kahta hai nuksan bhi n ho

 

best allama iqbal shayari

मुलाकातें नहीं मुमकिन हमें अहेसास है लेकिन..

तुम्हे हम याद करते है बस इतना याद रखना तुम


mulakate nahi mumkin hame ahsas hai lekin

tumhe yaad karte hai bs itna yaad rakhna tum


मत पूछ के हम मोहब्बत कि किस रह से गुज़रे है

ये देख के तुझ पर कोई इलज़ाम ना आने दिया


mat puchh ke hum muhabbat ke kis raah se gujre hai 
ye dekh ki tujh pe koe ilzam n ane diya

पूछते हो तुम्हे क्या  पसंद है

जवाब खुद हो फिर भी सवाल करते हो


puchhte ho tumhe kya pasand hai

jwab khud ho fir swal karte ho

 

अल्लामा इकबाल शायरी


दिल की बस्ती अजीब बस्ती है, 

लूटने वाले को तरसती है.


dil ki basti ajib basti hai

lootne wale ko trasti hai


अनोखी बजह है सारे ज़माने से निराले हैं 

ये आशिक़ कौन सी बस्ती के रहने वाले हैं


anokhi bajah hai sare jmane se nirale hai

ye ashik kon si basti ke rahne wale hai


साकी की मुहब्बत में दिल साफ हुआ इतना

जब सर को झुकाता हूं शीशा नजर आता है.


saki ki muhabat me dil saf hua itna

jab sar ko jhukata hu shisha nazar ata hai


पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात

तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा


pani pani kar gayi mujhko kalander ki wo bat

tu jhuka jo gair ke age n tan tera n man tera


नशा पिला के गिराना तो सब को आता है

मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी


nsha pila ke girana to sab ko ata hai

mja to tab hai ki girto ko tham le saki


तेरे सजदे कहीं तुझे काफ़िर ना कर दे ऐ इकबाल

जो झुकता कहीं और है सोचता कहीं और है.


tere sajde kahi tujhe kafir n kar de ae iqwal

jo jhukta kahi or hai sochta kahi or hai

 

Allama Iqbal Shayari


दिल में खुदा का होना 

लाज़मी है इक़बाल

यूँ सज़दों में पड़े रहने से 

जन्नत नहीं मिलती 

 

iqwal shayari

 लोग कहते हैं बस फ़र्ज़ 

अदा करना है

ऐसा लगता है कोई 

क़र्ज़ लिया हो खुदा से 


हंसी आती है मुझे 

हसरत ऐ इंसान पर 

गुनाह करता है खुद

लानते भेजता है शैतान पर  

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