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ghar par raho surakshit raho



ghar par raho surakshit raho




इन्सान की चाहत है कि उड़ने को पर मिले,
और परिंदे सोचते हैं कि रहने को घर मिले




घर पर रहो सुरक्षित रहो




ghar par rahiye surakshit

एक जमाना था जब 
घर पर पड़े रहने वालो को लोग 
निक्क्मा कहते थे 
और आज समझदार कहते हैं 
और नया पुराने